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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में रिकॉर्ड
अयोध्या: राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में दाखिल चार्जशीट अपने विशाल आकार को लेकर चर्चा में है। एसआईटी ने करीब 73,480 पन्नों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया है। उपलब्ध बड़े एकल आरोपपत्रों के आंकड़ों के आधार पर इसे उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा और देश की तीसरी सबसे बड़ी एकल चार्जशीट बताया जा रहा है।
मामले की जांच करीब 90 दिनों में पूरी की गई। आरोपपत्र को कई बड़े बक्सों में भरकर अदालत पहुंचाया गया। इसमें कथित चोरी की घटनाओं से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान, दस्तावेज, बैंक खातों के लेन-देन, मोबाइल डेटा और फोरेंसिक जांच से प्राप्त सामग्री को साक्ष्य के तौर पर शामिल किया गया है। एसआईटी की जांच में मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरों में कथित चोरी की 105 घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक जांच के दौरान करीब 79.85 लाख रुपये की बरामदगी दर्ज की गई। चार्जशीट में 173 गवाहों के बयान और 422 दस्तावेज शामिल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इस मामले में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश, रमाशंकर मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। सभी आरोपियों से संबंधित दस्तावेज और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य चार्जशीट का हिस्सा बनाए गए हैं। मामला रामजन्मभूमि थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। इसके बाद जांच के दौरान आरोपियों से पूछताछ के साथ बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल की गई। सुप्रीम कोर्ट के सामने भी एसआईटी की जांच की प्रगति से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई थी।
आरोपपत्र के आकार की तुलना देश के अन्य चर्चित मामलों से भी की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु के सेलम रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले में 15 लाख से अधिक पन्नों और 2जी स्पेक्ट्रम मामले में करीब 80 हजार पन्नों का आरोपपत्र दाखिल होने का उल्लेख मिलता है। इसी तुलना के आधार पर करीब 73,480 पन्नों वाली अयोध्या चढ़ावा चोरी की चार्जशीट को देश की तीसरी सबसे बड़ी एकल चार्जशीट बताया गया है।
हालांकि चार्जशीट के पन्नों की संख्या को लेकर मीडिया रिपोर्टों में अंतर भी है। कुछ रिपोर्टों ने लगभग 74 हजार पन्ने बताए हैं, जबकि अन्य रिपोर्टों में अलग संख्या प्रकाशित हुई है। इसलिए “प्रदेश की सबसे बड़ी और देश की तीसरी सबसे बड़ी” होने का दावा उपलब्ध प्रकाशित आंकड़ों की तुलना पर आधारित है। अब अदालत में आरोपपत्र और साक्ष्यों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी। जांच में सामने आए तथ्यों और आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की कार्यवाही के बाद ही होगा।
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